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साल 2021 खत्म होने के साथ ही नए साल 2022 के शानदार आगाज शुरू हो चुका है. नए साल से ढेर सारी खुशियों की उम्मीद है. आइये आपको बताते हैं नया साल 1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है.
नई दिल्ली: कुछ दिनों में हम नए साल 2022 में प्रवेश कर गए हैं. आज से 2021 को अलविदा कहते हुए पूरी दुनिया नए साल 2022 का खुले दिल से स्वागत करेगी. सभी की यही चाहत है कि नया साल खुशियां लेकर आए. साथ ही लोगों की यह मनोकामना जरूर होगी कि कोरोना महामारी का 2022 में अंत हो जाए. पूरी दुनिया 31 दिसंबर को मध्यरात्रि 12 बजे के बाद पुराने साल को अलविदा करते हुए नए साल का स्वागत करती है. अब यहां पर यह जान लेना भी जरूरी है कि हम हर साल जनवरी में ही नया साल क्यों मनाते हैं. आइये आपको बताते हैं इसके पीछे का इतिहास...
1 जनवरी को नहीं मनाते थे नया साल
आपको बता दें कि सदियों तक नया साल 1 जनवरी को नहीं मनाया जाता था. यह कभी 25 मार्च तो कभी 25 दिसंबर को मनाया जाता था. सबसे पहले रोम के राजा नूमा पोंपिलस ने रोमन कैलेंडर में बदलाव किए थे. कैलेंडर में जनवरी को पहला माना गया. इस बदलाव से पहले तक मार्च को पहला महीना माना जाता था.
जनवरी महीने का नाम कैसे पड़ा?
अब आपको बताते हैं जनवरी महीने का नाम कैसे पड़ा. जनवरी का नाम जानूस (Janus) पर रखा गया है. जानूस को रोम में शुरुआत का देवता माना जाता है.
मार्च के नाम के पीछे का इतिहास
मार्च का नाम मार्स (mars) पर पड़ा है. मार्स को युद्ध का देवता माना गया है. सबसे पहले इजाद हुए कैलेंडर में सिर्फ 10 महीने ही होते थे. वहीं, एक साल में 310 दिन होते थे, सप्ताह भी 8 दिनों का होता था.
310 की जगह 365 दिन
रोमन कैलेंडर में रोम के अगले शासक जूलियस सीजर ने कुछ बदलाव किए. उन्होंने 1 जनवरी से नए साल की शुरुआत की. जूलियस कैलेंडर में साल में 12 महीने किए गए. जूलियस सीजर ने खगोलविदों से मुलाकात के बाद जाना कि पृथ्वी 365 दिन और छह घंटे में सूर्य की परिक्रमा लगाती है. इसे ध्यान में रखते हुए जूलियन कैलेंडर में साल में 310 की जगह 365 दिन किया गया.
लीप ईयर कैसे और किसने बनाया
वहीं बचे हुए 6 घंटे को लीप ईयर का कॉन्सेप्ट दिया गया. हर 4 साल में यह 6 घंटे मिलकर 24 घंटे हो जाते हैं, यानी एक दिन. इसे देखते हुए हर चौथे साल फरवरी को 29 दिन का किया गया और इस साल को लीप ईयर का नाम दिया गया.
ग्रेगोरियन कैलेंडर
पोप ग्रेगरी ने 1582 में जूलियन कैलेंडर में लीप इयर को लेकर त्रुटि निकाली. सेंट बीड नाम के धर्म गुरु ने उस वक्त बताया कि एक साल में 365 दिन और 6 घंटे न होकर 365 दिन 5 घंटे और 46 सेकंड होते हैं. रोमन कैलेंडर में बदलाव करते हुए नया कैलेंडर पेश किया गया. तब से 1 जनवरी को नए साल की मनाया जाने लगा.
भारत में नया साल
भारत में नया साल अलग-अलग जगह स्थानीय रिवाज के हिसाब से भी मनाया जाता है. नए साल की ज्यादातर तिथियां मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ती हैं. पंजाब में नया साल बैसाखी के रूप में 13 अप्रैल को मनाया जाता है. सिख धर्म को मानने वाले इसे नानकशाही कैलेंडर के अनुसार मार्च में होली के दूसरे दिन मनाते हैं. जैन धर्म के लोग नए साल को दिवाली के अगले दिन मनाते हैं. यह भगवान महावीर स्वामी की मोक्ष प्राप्ति के अगले दिन से शुरू होता है.

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