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मुक्ति का मार्ग


तुम्हारी मुक्ति का मार्ग धर्मशास्त्र व मंदिर नहीं है, बल्कि तुम्हारा उद्धार उच्च शिक्षा, व्यवसाय बनाने वाले रोजगार तथा उच्च आचरण व नैतिकता में निहित है। तीर्थयात्रा व्रत पूजापाठ व कर्मकांडों में कीमती समय बर्बाद मत करो। धर्मग्रंथों का अखण्ड पाठ करने, यज्ञों में आहुति देने व मंदिरों में माथा टेकने से तुम्हारी दासता दूर नहीं होगी। तुम्हारे गले में पड़ी तुलसी की माला गरीबी से मुक्ति नहीं दिलाएगी। काल्पनिक देवी - देवताओं की मूर्तियों के आगे नाक रगड़ने से तुम्हारी दरिद्रता व गुलामी दूर नहीं होगी। अपने पुरखों की तरह तुम भी चीथड़े मत लपेटो, दड़बे जैसे घरों में मत रहो और इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर जान मत गवाओं। भाग्य और ईश्वर के भरोसे मत रहो, तुम्हें अपना उद्धार खुद करना है । धर्म मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं है। जो धर्म तुम्हें इंसान नहीं समझता वह धर्म नहीं अधर्म का बोझ है। जहां ऊंच नीच की व्यवस्था है, वह धर्म नहीं गुलाम बनाने की साज़िश है।


डॉ० भीम राव अंबेडकर

हिन्दू सनातन धर्म के नाम से मनुवादी ब्राह्मण obc, sc व st के अंधभक्तों को केवल इस्तेमाल कर रहा है।  मतलब जब मस्जिद गिरवानी होती है तो 85% शूद्रों को यानी obc, sc व st को हिन्दू बनाती है, जब मन्दिर बनवानी होती है तो तब शूद्रों को हिन्दू बनाती है  और जब कोई चुनाव आती है तो शूद्रों को हिन्दू बना लेती है  लेकिन जब सारा मतलब निकल जाता है तो शूद्रों को सिर्फ शुद्र ही मानती है  मतलब जब संविधान के द्वारा से कोई मलाई खाने की बात आती है अथवा कोई पद व कायदे फायदे की बात आती है तो शूद्रों को हिन्दू बनाने के बजाय शुद्र ही मानती है।


अगर obc, sc व st के अंधभक्तों आपको विश्वास नहीं हो रहा है तो पूछो अपने धार्मिक अगुवाकार मनुवादी ब्राह्मण लोगों से  जब देश में ब्राह्मणों की संख्या मात्र 3.5% है तो बिना आरक्षण के 45.5% हिस्सा किसका और क्यों खा रहे थे और तो और 10% हिस्सा डंके के चोट पर और भी ले लिया मतलब अब 55.5% हिस्सा अकेले ही क्यों लीले जा रहे हो ?


और उल्टे हम शूद्रों पर ही आरोप लगाते फिर रहे हो कि यह शुद्र लोग आरक्षण के कारण देश को बर्बाद कर रहे हैं। जबकि देश को कौन बर्बाद कर रहा है यह बात अब हम अंधभक्तों मतलब obc, sc व st अथवा शूद्रों को समझना होगा वरना आने वाली हमारी पीढ़ी केवल धार्मिक मानसिक गुलाम बनकर रह जायेगी और सारा माल मनुवादी ब्राह्मण खाएगी।  और हम सबकी पीढियां केवल भीख मांगकर ही खाएगी। और जो भी जैसा भी मनुवादी ब्राह्मण चाहेंगे शूद्रों  ( obc, sc व st ) को नचायेगी घुमाएगी अपने हिसाब से मजदूरी करवाएगी।

मेहनताना देगी या नहीं  देगी यह सब मनुवादियों के मर्जी पर ही निर्भर करेगी।


.* ब्राह्मण ना तो भूतों से डरता है,

 * ना ही डरता है मरी शमशान से,

 * वो ना डरता है किसी भगवान से,

 * वो डरता है शूद्रों को हक अधिकार देने से।

 * वो डरता है शूद्रो को बराबरी का दर्जा देने से।

 * वो डरता है  एससी, एस टी, ओबीसी से जो शूद्र हैं,

 * वो कहीं उनसे आगे ना निकल जायें।

 * वो डरता है उनके फैलाये हुये अंधश्रद्धा व आस्था के चंगुल से कहीं एससी, एस टी, ओबीसी बाहर ना निकल जाये।

 * वो डरता है सबकी समानता से,

 * वो सोचता है, अगर कोई नीच ही नही रहेगा तो वो ऊँचा कैसे रहेगा।

 * वो डरता है, एससी, एस टी , ओबीसी से क्योंकि अगर 

 * जाति आधार पर आरक्षण दिया जायेगा।

 तो शूद्र अपनी तरक्की कर लेगा। 

 * और उसकी चंगुल से बाहर निकल जायेगा। 

 * खुद जागेगा और औरों को भी जगायेगा।

 * वो ऐसी हर उस बातों से डरता है।

 * कहीं  एससी, एस टी, ओबीसी एक हो गया तो फिर इस देश का नियंत्रण obc के हाथ में आ जायेगा और obc न्यायपूर्ण समानता से संपूर्ण देश को चलायेगा और उनका काला चिठ्ठा बाहर निकालेगा। और उनको दंडित भी करेगा। 

 * इस लिये हर हाल में वह  एससी, एस टी, ओबीसी को कभी एक होने नही देगा।

 * वह हर हाल में अपना प्रभुत्व नही छोड़ेगा उसके लिए चाहे कितने ही लोग मरे।

 * चाहे देश हजारों साल पीछे चला जाये।

 * उसे अपने स्वामित्व तथा प्रभुत्व से मतलब है। 

 * उसे अपनी और अपने समुदाय की छोड़ 

 देश में किसी की कोई परवाह नहीं है। 

 * देश की जनता को गंभीरता से सोचना पड़ेगा।

 * वह कैसे हालात वाला देश चाहता है। 

 * सत्ता तख्ता पलट होना चाहिए। 

 * अपनी सत्ता  के अस्तित्व में रहने के लिए  इन्होंने क्या क्या षडयंत्र किये हैं यह सब जनता को पता है। 

 * इसके बावजूद भी जनता क्या सोचती है।

 * वह तो जनता जनार्दन पर ही निर्भर है।


 वो डरता है तो सिर्फ,. .. .

 * डा० बाबा साहब भीम राव  अम्बेडकर और उनके संविधान से....

अंधविश्वास, ढोंग,पाखण्ड, असमानता, ढकोसला, छुआछूत बेईमानी, भगाओ सच्चे भारतीय बनों। 

 अब भी जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है जातिवाद खत्म करो।

आज भी एक अनपढ़ पांचवीं फेल पंडित पंडित कहलाता है और दलित Engineer, doctor, professor, scientist, officer, Ph D किया हुआ भी शूद्र या दलित कहलाता है आखिर क्यों अभी तक जातिवाद फैलाया हुआ है।


🙏 *विशेष निवेदन /आग्रह*🙏

*जन जागृति* के लिए आपको सिर्फ 10 लोगों को ये मेसेज फॉरवर्ड करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को ये मेसेज करें ।

इस प्रकार

1 = 10 लोग 

यह 10 लोग अन्य 10 लोगों को मेसेज करेंगे 

इस प्रकार :-

10 x10 = 100

100x10=1000

1000x10=10000

10000x10=100000

100000x10=1000000

1000000x10=10000000

10000000x10=100000000

100000000x10=1000000000

                            (100 करोड़ )

बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा।

"भारत एकता मिशन अम्बेडकर (लक्ष्य करोड़ों मूलनिवासियों के अपना अधिकारों का)"

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