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आपका बैंक खाता मिनटों में खाली हो सकता है, आपको पता भी नहीं चलेगा, जानिए कैसे

- फिशिंग वेबसाइटों से रहें सावधान, नहीं तो खाली होगा बैंक अकाउंट

भोपाल। जामताड़ा की साइबर फ्रॉड गैंग ने लोगों के खून-पसीने की कमाई लूटने के लिए अब अपना तरीका बदल लिया है। कॉल कर बैंक की डिटेल पूछने की बजाए अब अपराधी सीधे इंटरनेट की दुनिया में अपना जाल बिछा कर लोगों को फंसाने लगे हैं। शहर में पिछले एक साल के दौरान ऐसे 12 से ज्यादा केस सामने आए हैं, जिनमें जामताड़ा की उपस्थिति दर्ज की गई है। आमतौर पर फर्जी कॉल के जरिए बैंक की जानकारी लेने के मामले का खुलासा होने के बाद लोग अब सावधानी बरतने लगे हैं, इसलिए जामताड़ा गैंग ने भी अपना तरीका बदला है।



आरोपी अब नामी कंपनियों की फर्जी वेबसाइट और नकली कॉल सेंटर के इंटरनेट लिंक बनाकर गूगल पर डाल रहे हैं ताकि लोग इनमें खुद ही चलकर आएं और फंस जाएं। एक बार फर्जी लिंक में फंसने के बाद शिकार के बैंक खाते की जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती हैं और आरोपी मनचाहे तरीके से राशि दूसरे बैंक खाते में पहुंचा देते हैं। जालसाजी के इस तरीके को फिशिंग कहते हैं, जिससे बचने के लिए पुलिस लोगों को समय-समय पर सलाह दे रही है ।

केस-1

98,897  निकल गए

फोन पर अकाउंट पर 600 का पेंडिंग पेमेंट पता लगाने के लिए शिवाजी नगर निवासी संजय गडकरी ने गूगल पर कॉल सेंटर का पता लगाने का प्रयास किया। उन्हें कॉल सेंटर के नाम से एक कस्टमर केयर नंबर मिला जिस पर संपर्क करने के बाद उनके खाते से 98,897 रुपए निकल गए। ये नंबर जामताड़ा का पाया गया।


केस-2

एडवांस भुगतान के नाम पर ठगा मिसरोद थाना अंतर्गत बाहुबली नगर जाट खेड़ी में रहने वाली वंशिका जायसवाल ने ऑनलाइन पुरानी साइकिल खरीदने का प्रयास किया। एक वेबसाइट पर साइकिल बेचने का विज्ञापन देखकर व्यक्ति से संपर्क किया। एडवांस भुगतान कर नाम पर उसके बैंक खाते से अलग-अलग हिस्सों में 20,049 रुपए निकाल लिए गए।


फिशिंग कैसे करते हैं

इलेक्ट्रॉनिक संचार में फ़िशिंग या इलेक्ट्रोनिक ठगी, जालसाजी, एक ऐसा कार्य है जिसमें हैकर्स द्वारा किसी विश्वसनीय इकाई का मुखौटा धारण कर उपयोगकर्ता का नाम, पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड का विवरण जैसी विभिन्न जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया जाता है। आशंकित यूजर्स को लुभाने के लिए इस तरह का संचार आमतौर पर लोकप्रिय सामाजिक वेबसाइटों, नीलामी साइटों, बैंकों, ऑनलाइन भुगतान प्रोसेसर या आइटी एडमिन के नाम पर किया जाता है।

अकसर उपयोगकर्ताओं को एक नकली वेबसाइट जिसका रूप और अनुभव बिल्कुल असली वेबसाइट के समान होता है पर, अपने विवरण दर्ज करने के लिए निर्देशित किया जाता है। ये निर्देश ईमेल पर लिंक भेझ कर या किसी अन्य माध्यम से दए जाते हैं।


आप फिशिंग से ऐसे बच सकते हैं

  • - उस ईमेल के प्रति अधिक सतर्कता बरतें जो गोपनीय सूचनाओं की मांग करे, खासतौर पर वित्त से जुड़ी हुई। यदि बैंक की तरफ से भी ईमेल भेजा गया हो तो पहले फोन करके ईमेल भेजने वाले की पहचान और उस मेल की सत्यता की पुष्टि कर लें।
  • - अर्जेंट या बैंक अकाउंट बंद कर देने वाली सूचना या तकनीकी भाषा के दबाव में न आएं। ईमेल से जुड़े वेबपेज के जरिए वेबसाइट ओपन करने की कोशिश न करें।
  • - बैंक या किसी भी वेबसाइट पर जाने के लिए कम्प्यूटर ब्राउज़ के एड्रेस बार पर कंपनी की यूआरएल टाइप करके ही वेबसाइट ओपन करें।
  • - किसी वेबसाइट की शुरुआत एचटीटीपी से हो रही है तो यह जरूरी नहीं कि वेबसाइट लॉक्ड डाउन यानी सुरक्षित या प्रामाणिकता हो।
  • - कई फिशर यूआरएल से ही वेबसाइट की शुरुआत करते हैं ताकि आपको लगे कि वेबसाइट प्रामाणित है।
  • - कोई भी सूचना या जानकारी देने से पहले यूआरएल प्रामाणिकता की जांच करने के लिए ब्राउसर के लॉक्ड सिम्बल पर क्लिक करके देख लें।

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